पैगम्बर मुहम्मद (स.अ. व. ) का अपमान असहनीय।

मुसलमानों की भावना को आघात पहुंचाने के दोषी नरसिंहानंद जैसे गुस्ताखों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए: मुशावरत नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत ने तथाकथित स्वामी यति नरसिंहानंद की पैगंबर मुहम्मद (स. अ. व.) की शान में गुस्ताखी की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इस बदजुबान व्यक्ति द्वारा कहे गए अपमानजनक शब्द असहनीय हैं। मुस्लिम संगठनों के संघ ‘मुशावरत’ के अध्यक्ष फिरोज अहमद, एडवोकेट ने कहा कि सरकार को ऐसे बदजुबान को अविलंब गिरफ्तार कर मुकदमा चलाना और सख्त से सजा देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उसे आज़ाद छोड़ देना ख़तरनाक है, ऐसे व्यकित के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है, ऐसे बदज़ुबान व्यक्ति की जगह जेल है। उन्होंने कहा कि उसकी इस हरकत से देश में शांति व्यवस्था को ख़तरा दरपेश है। मुशावरत के अध्यक्ष ने कहा कि मुसलमान एक ईश्वर में आस्था रखते हैं और मूर्तिपूजा इस्लाम में सबसे बङा पाप है, लेकिन इस्लाम अपने अनुयायियों को किसी भी धर्म की पवित्र हस्तियों को अपमानित करने से रोकता है और किसी की भावनाओं को चोट पहुंचाने की अनुमति नहीं देता। कु़रआन उन देवी-देवताओं को भी बुरा भला कहने से मना करता है जिनको गैर मुस्लिम पूजते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नरसिंहानंद की यह हरकत एक ऐसा कुकृत्य जिसको सहन नहीं किया जा सकता लेकिन हमें इस बदजुबान के विरुध कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए और सरकार से इस व्यक्ति को दंडित करने की मांग करनी चाहिए। मुसलमानों को चाहिए कि वह कहीं भी हों वहां पर अपने देशवासियों से पैग़म्बर मुहम्मद (स. अ. व.) के आदर्श जीवन (सीरत) का परिचय कराएं, और उनको ये भी बताएं कि मानव जाति की मुक्ति, स्वतंत्रता और समानता के दुश्मनों को मानवता के उद्धारक पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से क्या तकलीफ है और वे उनका चरित्र हनन इस लिए करते हैं ताकि पीड़ितों को एकजुट होने और उनकी न्याय और समानता की शिक्षाओं को अपनाने से रोक सकें।
डॉ. इदरीस कुरैशी दिल्ली राज्य मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत के अध्यक्ष नियुक्त

निर्विरोध चुनाव में सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया, नए चुने हुए अध्यक्ष का गर्मजोशी से स्वागत नई दिल्ली: तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार, रविवार को, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत दिल्ली राज्य के अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न हुआ। चुनाव की कार्यवाही केंद्रीय कार्यालय में सुबह 10 बजे शुरू हुई, उम्मीदवारों के नाम दोपहर 3 बजे तक सुझाए गए, मुशावरत के सदस्यों द्वारा तीन सुझाव दिए गए थे, लेकिन तीनों में अध्यक्ष पद के लिए एक ही नाम प्रस्तुत किया गया था। वर्तमान दिल्ली के अध्यक्ष सैयद मंसूर आगा ने अगले दो वर्षों के लिए डॉ इदरीस कुरैशी के पक्ष में एलान किया और सदस्यों ने उनका गर्मजोशी से समर्थन किया। जिसके बाद, निर्वाचन अधिकारी अब्दुल राशिद अंसारी और ऑब्जर्वर मोहम्मद आकिफ ने परिणामों की घोषणा की।गौरतलब है कि मुशावरत के नियम व क़ायदे के अनुसार, डॉ. इदरीस कुरैशी एक गवर्निंग कॉउंसिल का गठन करेंगे, जिसमे कम से कम 11 सदस्य शामिल होंगे, डॉ. इदरिस कुरैशी को दो वर्ष के लिए दिल्ली राज्य मुस्लिम मुशावरत का अध्यक्ष चुना गया है।मुशावरत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट फिरोज़ अहमद, दिल्ली मुशावरत के पूर्व अध्यक्ष सैयद मंसूर आगा, रिटर्निंग ऑफिसर अब्दुल रशीद अंसारी, पर्यवेक्षक मोहम्मद आकिफ, डॉ. तसलीम रहनी, दिल्ली के पूर्व अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ज़किर खान और मुशावरत के सभी सदस्यों ने बधाई दी।इस अवसर पर, मुशावरत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट फिरोज़ अहमद ने डॉ. इदरीस कुरैशी को बधाई दी और कहा कि दिल्ली राज्य मुशावरत को और अधिक सक्रिय बनाने के लिए हर संभव तरीके से सहयोग करेगी। इसके साथ ही महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और दिल्ली इकाई और अब तमिलनाडु और केरल में एक मुशावरत इकाई स्थापित करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। पुराने और नए सदस्यों को जोड़ने में सैयद मंसूर आगा द्वारा सहयोग किया गया।दिल्ली राज्य मुशावरत के पूर्व अध्यक्ष सैयद मंसूर आगा ने कहा कि डॉ. इदरीस कुरैशी को हमारा हमेशा पूरा समर्थन व सहयोग मिलेगा, जबकि केंद्रीय मुशावरत के वरिष्ठ सदस्य डॉ. तसलीम अहमद रहमानी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के हालात में मुशावरत को मजबूत करना बेहद ज़रूरी है।इस चुनाव प्रक्रिया में केंद्रीय मुशावरत के अलावा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। जिसमे मरकज़ी जमीयत अहले हदीस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट, ऑल इंडिया जमीयतुल क़ुरैश, ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस, मूवमेंट फ़ॉर एम्पावर्मेंट ऑफ मुस्लिम इंडियनस, ऑल इंडिया मुस्लिम ओबीसी आर्गेनाईजेशन, क़ुरैश कॉन्फ्रेंस(रजि), एएमयू ओल्ड बॉयज एसोसिएशन-केंद्रीय व दिल्ली यूनिट, ऑल इंडिया मुस्लिम बैकवर्ड क्लासेज फेडरेशन, ऑल इंडिया मुस्लिम एजुकेशनल सोसायटी, यूनाइटेड वेलफेयर एसोसिएशन, कारवां फाउंडेशन, वॉलंटियर्स ऑफ चेंज, ओखला प्रेस क्लब (रजि.) और अन्य संगठन भी शामिल रहे।इस अवसर पर, मुशावरत के सदस्य डॉ. मुहम्मद शीश तैमी, डॉ. मुहम्मद फेयाज़, डॉ. जावेद आलम खान, अहमद जावेद, एडवोकेट रईस अहमद, मोहम्मद रईसुल आज़म, मोहम्मद मोइनुद्दीन, डॉ. नबील सिद्दीकी, मोहम्मद इलियास सैफी, मौलाना निसार अहमद हुसैनी-अध्यक्ष इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग-दिल्ली स्टेट, आसिफ अंसारी-राष्ट्रीय अध्यक्ष यूथ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, ज़ीशान खलीक, इमलाक अहमद, शेख यामीन कुरैशी, रईस आज़म खान, अज़ीज़ुर -रहमान राही, मेहताब आलम, डॉ. सैयद मुहम्मद फैसल, मोहम्मद मोईनुद्दीन हबीबी, मोहम्मद फैज़ान रहमान, मोहम्मद मोइनुल हक खान, अब्दुल जब्बार, मोइन कुरैशी, रईस अहमद, अधिवक्ता मोहम्मद तेयब खान, असलम अहमद (अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट), बद्र आफाक़, डॉ. अतहर इलाही खान, शेर मोहम्मद, मसरूर हसन सिद्दीकी अधिवक्ता, सैयद रोमान हाशमी, डॉ. एम. अथरुद्दीन (मुन्ने भारती), अजमेरी सोहेल, मलिक तहसीन अहमद, मोहम्मद इरफान, सनोबार अली एडवोकेट, अब्दुल रहमान , मोहम्मद आतिफ, सैयद इशरत अली, मोहम्मद खालिद, मुदस्सर हयात और कबीर खान इत्यादि मौजूद थे।
वक्फ अधिनियम में संशोधन अस्वीकार्य: मुस्लिम मजलिसे-मुशावरत

प्रेस विज्ञप्ति नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे-मुशावरत ने वक्फ अधिनियम में संशोधन के सरकार के फैसले को अस्वीकार्य बताया है और कहा है कि सरकार किसी न किसी बहाने मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है, जिससे देश की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था नष्ट हो रही है. मुशावरत के महासचिव शेख मंज़ूर अहमद ने अपने एक बयान में कहा कि सरकार वक्फ बोर्डों की शक्तियों को सीमित करना चाहती है और किसी तरह उन संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है जो हमारे पुरखों ने धार्मिक और कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए वक्फ की हैं। सरकार का काम उन को विनियमित करना है लेकिन वह उन्हें हड़पना चाहती है और वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वालों के लिए कानून का दरवाजा खोलना चाहती है। शेख मंज़ूर अहमद ने कहा कि यह अफ़सोस की बात है कि वक्फ अधिनियम में संशोधन करने से पहले किसी भी मुस्लिम संगठन, बुद्धिजीवियों, कानून के विशेषज्ञों और इस्लामी विद्वानों से परामर्श नहीं किया गया। इससे सरकार की मंशा स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि वक्फ बोर्डों की स्थिति को बरकरार रखा जाये और वक्फ संपत्तियों का उपयोग शरीयत के अनुसार किया जाये, वर्तमान में 8 लाख 70 हजार से अधिक संपत्तियां वक्फ बोर्डों के नियंत्रण में हैं और इसका उपयोग धर्मार्थ उद्देश्यों और समाज कल्याण के लिए किया जाना चाहिए न कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए। मुशावरत ने सरकार की इस प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि वह न केवल देश की व्यवसथा के कल्याणकारी चरित्र को कमजोर कर रही है बल्कि भारतीय समाज में कल्याणकार्य की परंपराओं को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है और भूखों-अनाथों को समर्पित संपत्ति पर उसकी बुरी नजर है. शहाबुद्दीन कार्यालय सचिव, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे-मुशावरत
Appeal Against the biased Order of Inquiry and Intervention in Madrasahs by the state government of Uttar Pradesh and the Child Rights Commission of India

Date:26th July 2024 To, Madam Draupadi Murmu The Hon’ble President of India, Rashtrapati Bhavan, New Delhi – 110004 Subject: Appeal Against the biased Order of Inquiry and Intervention in Madrasahs by the state government of Uttar Pradesh and the Child Rights Commission of India Respected Hon’ble Madam President, On behalf of the members of All India Muslim Majlis e Mushawarat (AIMMM), the only confederation of Muslim organizations and personalities of eminence, I take the privilege of writing to you with a deep sense of concern regarding the recent directives issued by the Chief Secretary of Uttar Pradesh and the Child Rights Protection Commission of India to inquire into the functioning of Madrasahs in the state of Uttar Pradesh and transition their students to government schools. The directive also says, “the Hindu Students should not be there”. This directive, we believe, is an unwarranted and unconstitutional interference in the religious and educational rights of the Muslim minority community. The right to establish and administer educational institutions of our choice is a fundamental right guaranteed under Article 30(1) of the Constitution of India. This provision ensures that minorities, whether based on religion or language, have the absolute right to establish and administer educational institutions to preserve and transmit their heritage, culture, and religion to their children. Madrasahs play a crucial role in the holistic development of Muslim children, providing not only religious education but also contributing to their moral and ethical upbringing and literacy rate of the nation. The institutions have integrated modern education curricula, ensuring that their students receive a balanced Universal Elementary education. The sudden and unilateral move to transition students to government schools disregards the efforts and contributions of these institutions and violates the community’s right to educate their children in accordance with their religious beliefs. This system of free education committed to weaker section of the community, which came into existence by self-determined social responsibility of Muslims, has been rendering valuable services to the nation for more than a thousand years, and a large part of it is also a big and unparallel successful example of Public Private Partnership. Right now, according to the latest analysis of available data, more than one crore male and female pupils are studying in the madrasas across the country and lakhs of them are in the state of UP. This institution of learning (Madrasahs) carries the burden of early leaning of the Children of the nation without any cost and any kind of discrimination. There are a massive number of children admitted to Madrasahs from weaker sections of other communities from the remote areas of the country. The central government SPQEM reports find that there is the children’s attendance visibly more than government schools and teachers are more punctual, responsible and attention paying to the students. It is pertinent to mention that overwhelming number of students enrolled in the Madrasahs are not only from the BPL families, but they also are admitted due to non-availability of the government primary schools in the immediate neighborhood. Similarly, thousands of Muslim and other religion children study in Vedic Pathshalas, Shishu Mandir and Christian missionary schools. Only targeting the Madrasahs is exposing the intention. The education system of the state is very poor, more than 100 Shiksha Mitras have committed suicide due to non-payment of salary. Targeting the Madrassas will have very bad effects on the state of education in the state. There are a massive number of part-time informal learning centers in the country, out or in the premises of Masjids, the government of Uttar Pradesh is spreading sensation by counting them as madrasahs. Children of these institutes are also admitted to local schools / formal institutes as well as big seminaries (Darul-uloom) give them admission after completion of primary education (UEE). A best example of the contribution of these institutions in the field of education is Kerala, which has the highest position in the country in terms of health care, poverty alleviation and basic education in the Social Development Index, and UNICEF and the WHO place first the state for Child Care. In achieving this, the contributions of these informal part-time learning centers are considered very important. The states should seek their cooperation and not harass them unconstitutionally, while the Right to Education Act has bound the Center and the states to provide quality education to the children in the educational institutions of their choice and Religious Learning are protected by the law. We would like to highlight the following points for your kind consideration: Constitutional Rights: The directive undermines Article 30(1) which guarantees minorities the right to establish and administer educational institutions of their choice. This act can be perceived as an attempt to erode the educational autonomy of the Muslim community. Inclusive Development: The government’s focus should be on enhancing the quality of education across all types of institutions, including Madrasahs, rather than dismantling them. Constructive engagement with Madrasah authorities to ensure quality education would be a more inclusive and effective approach. Therefore, we earnestly request your esteemed office to intervene in this matter and direct the Uttar Pradesh government to withdraw the said directive. We urge you to safeguard the constitutional rights of the Muslim minority and ensure that the principles of justice, equality, and secularism are upheld. We are confident that under your leadership, the rights and freedoms guaranteed by our Constitution will be protected, ensuring that all communities can coexist and contribute to the nation’s progress in harmony. With warm personal regards Yours sincerely, Sd- Feroz Ahmad, Advocate President All India Muslim Majlis-e-Mushawarat
Legal Notice to Mohammad Sulaiman to stop impersonating as Vice President of AIMMM & claiming to be Professor.

Date: 18th July 2024 Mr. Mohammad Sulaiman Sahab 88/178, Chaman Ganj, Shafiabad Kanpur – 208 001(U.P.) Dear Sulaiman Sahab It has come to our knowledge that since last one months, you have been indulging in claiming to be Vice-President of All India Muslim Majlis -e- Mushawarat (AIMMM) launched in 1964 and issuing statements to press impersonating as its Vice-President. In the last elections of the AIMMM held in 2022-2023 for the tenure of 2023-2027, in which you had yourself participated as a voter, a new team the office bearers were elected in which the eligible voters of AIMMM elected me as president along with 25 members of the Markazi Majlis-e-Amla of AIMMM and there is no provision of elections of any office bearers other than for these 26 posts. You are fully aware that the constitution of AIMMM clearly gives power under Article 8 2(a) to the president to appoint the other office bearers, including the vice president. After assuming charge of the office of AIMMM on 2nd April 2023, the undersigned has appointed 3 Vice Presidents, Maulana Asghar Ali Imam Mehdi Salfi (Ameer, Markazi Jamiat Ahle Hadees Hind), Mr. E.T. Basheer Mohammad M.P (Muslim League) and Mrs. Abeda Inamdar (Educationist from Pune). Subsequently, again on dated 11.11.2023, exercising my powers to appoint vice president, I appointed Mr. Navaid Hamid as the fourth vice president. You were never appointed as any of the office bearer of All India Muslim Majlis -e- Mushawarat, and your impersonation as Vice-President is not only unethical but also illegal, which can invite civil and criminal proceeding against the fraudulent claim. It is pertinent to mention that you are also impersonating yourself as Professor to impress upon the common people for your wrongful gain, when you had never been Professor at any point of time with any university. It appears that you are intentionally and deliberately impersonating your self in different manner for your wrongful gain. You are requested to respond within 15 days as to why civil as well as criminal proceeding are not initiated against you beside disciplinary proceeding as per Dastoor of the Organisation. You are also advised to publicly apologize for your unethical acts with clear clarifications that you don’t hold any office post in All India Muslim Majlis -e- Mushawarat and you are not a Professor. Sd- Feroze Ahmad Advocate President, AIMMM
महामहिम ! कृपया यूपी सरकार को मदरसों के उत्पीड़न से रोकें

प्रेस विज्ञप्ति भारत के राष्ट्रपति को ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत का पत्र, मदरसों की गतिविधियों में हस्तक्षेप संविधान और कानून के खिलाफ है, कृपया मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, शैक्षिक स्वायत्तता और समग्र विकास का हनन न होने दें। मदरसों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले परिवारों से हैं और मदरसे उन्हें बिना किसी खर्च और भेदभाव के शिक्षा प्रदान करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार अनौपचारिक अंशकालिक शिक्षा व्यवस्थाओं को भी मदरसों में गिनकर सनसनी फैला रही है। नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रपति को संबोधित एक पत्र में, मुस्लिम संगठनों और प्रतिष्ठित नागरिकों के एकमात्र परिसंघ, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में धार्मिक शैक्षणिक संस्थानों को परेशान करने, मदरसे के बच्चों को स्कूल भेजने और गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालने की कार्रवाई की निंदा की है। मुशावरत ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए महामहिम द्रोपदी मुर्मू से अनुरोध किया है कि मदरसों की गतिविधियों में हस्तक्षेप करना संविधान और कानून के विरुद्ध है, कृपया मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, शैक्षिक स्वायत्तता और समग्र विकास का हनन न होने दें। मुशावरत ने भारत के राष्ट्रपति से यह भी अनुरोध किया है कि यहां मदरसों में दाखिला लेने वाले अधिकांश बच्चे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों से आते हैं और ये मदरसे उनको मुफ्त शिक्षा, भोजन और आवास प्रदान करते हैं। मुस्लिम संगठनों के परिसंघ ने कहा है कि संविधान धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और चलाने की गारंटी देता है, शिक्षा का अधिकार अधिनियम केंद्र और राज्यों को उनकी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य करता है और इस कानून में धार्मिक संस्थानों को संरक्षण दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि मदरसों पर देश भर में एक करोड़ से अधिक बच्चों और उत्तर प्रदेश में लाखों बच्चों की शिक्षा का भार है। केंद्र सरकार के मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के कार्यक्रम [SPQEM] की एक से अधिक रिपोर्टों में पाया गया कि यहां बच्चों की उपस्थिति सरकारी स्कूलों की तुलना में अधिक है और मदरसा शिक्षक सरकारी शिक्षकों की तुलना में समय के अधिक पाबंद, जिम्मेदार और छात्रों के प्रति अधिक जवाबदेह हैं। मदरसों में दाखिला लेने वाले छात्रों की बड़ी संख्या न केवल बीपीएल परिवारों से है, बल्कि आस-पास सरकारी प्राथमिक स्कूलों की कमी के कारण भी है। इसी तरह, हजारों मुस्लिम और अन्य धर्म के बच्चे वैदिक पाठशालाओं, शिशु मंदिरों और ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ते हैं। केवल मदरसों को निशाना बनाना सरकार की मंशा को उजागर करता है। राष्ट्रपति का ध्यान धार्मिक स्वतंत्रता, शैक्षिक स्वायत्तता और समग्र विकास पर आकर्षित किया गया और बताया है कि राज्य में शिक्षा प्रणाली की स्थिति बहुत खराब है, भुगतान न होने के कारण 100 से अधिक शिक्षामित्र आत्महत्या कर चुके हैं और मदरसों को हतोत्साहित करने से राज्य में शिक्षा की स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। याद रहे कि भाजपा की कई अन्य राज्य सरकारें भी इस तरह की कार्रवाइयां कर रही हैं, जो समाज में गहरी चिंता और बेचैनी का कारण हैं। पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार अनौपचारिक अंशकालिक शिक्षा केंद्रों को भी मदरसा के रूप में गिनकर सनसनी फैला रही है। गौरतलब है कि यूपी सरकार ने 8000 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की जो सूची जारी की है, उसमें कई निजी ट्यूशन, अनौपचारिक शिक्षा-स्थल, मस्जिदों के अंदर या अन्य जगहों पर स्थापित अंशकालिक पठन-पाठन व्यवस्था भी शामिल हैं, हालांकि उनके संचालकों या मस्जिद प्रशासन ने उनको कोई नाम भी नहीं दिया है। द्वारा जारी शहाबुद्दीन आफिस सेक्रेट
(pdf)مکتوب بنام ارکان و ہمدردان مشاورت

آل انڈیا مسلم مجلس مشاورت پر قبضہ کرنے کی مذموم سازش کے جواب میں مکتوب بنام ارکان و ہمدردان مشاورت

آستینوں میں چھپالیتی ہے خنجر دنیا اورہمیں چہرے کا تاثر نہ چھپانا آیا ملک میں اپنی نوعیت کی واحدتاریخی تنظیم” آل انڈیا مسلم مجلس مشاورت” کا قیام 1964 میں مسلم جماعتوں کے مشترکہ پلیٹ فارم کے طورپر جن حالات میں ہوا تھا،آج ہمارے سامنے ان سےکہیں زیادہ مشکل حالات ہیں اورکسی ذی شعورمسلمان کو احساس دلانے کی ضرورت نہیں ہے کہ اتحادویکجہتی کی قدروقیمت کیاہے۔پھربھی ہمیں مشاورت کے معزز ارکان کو یہ خط لکھنا پڑرہا ہےجوانتہائی تکلیف دہ ہے۔ آل انڈیا مسلم مجلس مشاورت کے سابق صدر اور سابق رکن ڈاکٹر ظفرالاسلام خاں صاحب نےارکان مشاورت کوخط لکھ کرایک بار پھر اختلاف و انتشارکوہوادینے اور غلط فہمیاں پیداکرنے کی کوشش کی ہے ۔ اس سے زیادہ افسوس کی بات یہ کہ وہ رجسٹرڈ مشاورت کا صدر ہونے کے دعویدارہیں اور لوگوں کو مشاورت کارکن بنانے کے نام پر چندہ کی مہم چلارہے ہیں جوان کا سراسر بےبنیاد دعویٰ اورگمراہ کن فعل ہے۔ اول تو اس گروپ کا جس نےاس وقت کےصدر مشاورت سید شہاب الدین مرحوم کی مخالفت میں مشاورت سےالگ ہوکر 2003میں سوسائٹی رجسٹرڈکرائی تھی، 2013میں اصل مشاورت کے ساتھ باضابطہ انضمام ہوچکا ہے اور رجسٹریشن کے اصل کاغذات ہماری کی تحویل میں ہیں،لہٰذا ایسی کسی سوسائٹی کا کوئی علاحدہ یامتوازی وجود اب کہیں باقی نہیں ہے۔خودراقم السطور شیخ منظوراحمدکوبھی اسی رجسٹرڈمشاورت نے رکنیت دی تھی اوراسی انضمام و اتحادکے نتیجے میں یہ حقیراب آل انڈیامسلم مجلس مشاورت کاحصہ ہے ۔دوم ڈاکٹر ظفرالاسلام خاں 2022 سے مشاورت کے رکن بھی نہیں ہیں، تادیبی کارروائی کے تحت موصوف کی رکنیت منسوخ ہوگئی تھی کیونکہ انہوں نے مختلف حیلوں بہانوں سے مشاورت اور اس کی جائیدادوں پر مستقل قبضہ کرنے کی کوشش کی تھی جس کی تفصیلات ارکان مشاورت کے علم میں ہیں۔ مشاورت کے تنظیمی امور میں مداخلت کا کوئی حق آں موصوف کو نہیں پہنچتا، ان کی یہ سرگرمیاں سراسر ناجائز اور قانوناً قابل مواخذہ ہیں۔وہ اور ان کے پیچھے جولوگ بھی ہیں مشاورت میں رجسٹرڈ سوسائٹی کے انضمام واتحاد کوتباہ کرنے کی مذموم سازش اورذاتی مفادات کےحصول کے لیے مشاورت کوناقابل تلافی نقصان پہنچانے کی کوشش کر رہے ہیں جوان شاء اللہ کامیاب نہیں ہوگی۔ضرورت ہے کہ ان عناصر کی سازشوں کا قلع قمع سختی سے کیا جائے ورنہ اتنا تفصیلی خط لکھنا اور آپ کو زحمت توجہ دینا کوئی خوشگوار عمل نہیں ہے۔ ڈاکٹر صاحب موصوف نے اپنے مکتوب (مرقومہ29اپریل 2024 ) کے ذریعے ارکان مشاورت کی میٹنگ بلائی ہےاورلوگوں کو ورغلانے کے لیےانہوں نے مشاورت پر اپنےبےبنیادسنسنی خیز الزامات کا اعادہ کیا ہے،مثلاً دستور مشاورت میں منمانی ترمیمات کی گئیں،مشاورت سے 70 ارکان کو نکال باہر کیاگیا اور غیرمعیاری لوگوں کو مشاورت کی رکنیت دی گئی جبکہ ان کا ایک بھی دعوی حقیقت سےقریب نہیں ہے۔ڈاکٹر خان کے دعووں کی دستاویزی تردیدمشاورت کے کاغذات میں موجود ہے ۔وہ اپنے زیرنظر مکتوب میں اپنی تحریروں، تقریروں اور مشاورت کی کارروائیوں میں موجود ان مندرجات کے برخلاف دعوے کررہے ہیں جن پر ان کے دستخط موجود ہیں ۔زیرنظرمکتوب میں آپ ان کی نکات وارتفصیلات د یکھ سکتے ہیں۔ جیساکہ آپ جانتے ہیں،مشاورت کے دستور میں کبھی کوئی منمائی ترمیم نہیں کی گئی اور ایسا کرناممکن بھی نہیں ہے۔اگریہ ممکن ہوتاتو ڈاکٹرصاحب موصوف اپنے دور صدارت کے آخری ایام میں ترمیم لانے کی جوکوشش کررہے تھے، ناکام نہ ہوتی ۔دستورمیں جو ترامیم آخری بار لائی گئی ہیں،ان میں ہرترمیم کو 67 فیصد سے 81 فیصد تک ارکان مشاورت کی تائید حاصل ہے اورترمیم شدہ دستور کے نفاذ کے بعد مشاورت کی مجلس عاملہ کے انتخابات (برائےمیقات 2026-2023 ) میں 85 فیصد سے زیادہ ارکان نے حصہ لیا اور منصب صدارت کے لئے دو امیدواروں کے درمیان دوستانہ مقابلہ میں منتخب امیدوار کو تقریباً 57 فیصد ووٹ حاصل ہوئے۔ڈاکٹر صاحب موصوف کااعتراض ان کے آمرانہ مزاج کا اشتہار اورایک انتہائی غیرجمہوری فعل ہے۔ دستور میں ترمیم یا اس کی کسی شق پر اختلاف رائے کو مسئلہ بناکر انتشار کو ہوا دینا ہر گز کوئی دانشمندی نہیں ۔جو لوگ بھی اس طرح کے کام کررہے ہیں،مسلمانوں کے اتحاد اور ملی تنظیموں کو نقصان پہنچا رہے ہیں۔ مشاورت ایک جمہوری تنظیم ہے اور دستور مشاورت میں ترمیم و تصحیح کا دروازہ ہر وقت کھلا ہواہے ۔ ارکان مشاورت جب چاہیں دستور میں مذکور ضوابط (Due process)کے تحت ایسا کر سکتے ہیں ۔ اگر دستور کی کسی شق پر کسی کے پاس کو ئی معقول اعتراض ہے تو وہ اپنی تجاویز مشاورت میں پیش کرے نہ کہ لوگوں کو ورغلاکر جتھے بنائے اوران کے دلوں میں وسوسے ڈالے۔ جن ارکان کی رکنیت دستورمشاورت کی روشنی میں ان کی عدم فعالیت اور ڈفالٹ کی بناپر منسوخ ہوئی تھی، ان کے تعلق سےڈاکٹر ظفرالاسلام خان صاحب نے اپنے خط میں دعوی کیا ہے کہ 70 ارکان کا مشاورت سے اخراج کردیا گیا جبکہ غیرفعال ارکان کی رکنیت منسوخ کرنے کی قرارداد خود ان کی اپنی صدارت میں منعقدہ مشاورت کی جنرل باڈی اور مجلس عاملہ کی 5 ِ دسمبر 2015ء کی مشترکہ میٹنگ میں منظورکی گئی تھی اوربالآخر 12 فروری 2017 کی جنرل باڈی میٹنگ میں جس میں ڈاکٹر ظفرالاسلام خان صاحب بنفس نفیس موجود تھے اور اس بات پر اصرار کر رہے تھے کہ ان ایکٹیو ارکان کا اخراج ہو، یہ طے کیا گیا تھاکہ فی الحال ایسے 14 ان ایکٹو (غیر فعال) ارکان کا اخراج کیا جائے۔ غیر فعال ارکان کا معاملہ اکتوبر 2018 کی حیدرآباد میں منعقد جنرل باڈی میٹنگ میں بھی زیر بحث آیا اور پھر27ِ فروری 2021 کوبھی اس معاملے پر آسام سے رکن جناب حافظ رشید احمد چودھری صاحب(جن کی حمایت کےڈاکٹرصاحب دعویدارہیں) کی تحریری قرارداد میٹنگ میں پیش ہوئی۔دستور کی متعلقہ شقوں اور قراردادمشترکہ اجلاس (5دسمبر2015) کی روشنی میں اس پرکارروائی کے نتیجے میں جن غیر فعال ارکان کی رکنیت منسوخ کی گئی، ان کی
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असम के प्रमुख रहनुमाओं और संगठनों के साथ मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत की मुलाक़ात

प्रेस विज्ञप्ति गुवाहाटी में बैठक , प्रतिभागियों ने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की, एकता के लिए काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई, चुनावों में ईवीएम के उपयोग और असम में मुसलमानों पर सरकारी अत्याचार और पीड़ितों के पुनर्वास के मुद्दे पर भी चर्चा की गई गुवाहाटी 23 अक्टूबर 2023: ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष फिरोज अहमद एडवोकेट के निर्देश पर असम का दौरा किया और राज्य के प्रमुख नेताओं और संगठनों से मुलाकात की। शनिवार को गुवाहाटी में हुई बैठक में मुशावरत के केंद्रीय प्रतिनिधियों ने राज्य के शीर्ष नेताओं के साथ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने ई वी एम के द्वारा चुनाव में कथित धांधली पर चिंता व्यक्त की और असम के मुसलमानों पर हो रहे सरकारी अत्याचार और पीड़ितों के पुनर्वास पर भी विचार किया गया। देश एवं राष्ट्र की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक समस्याएँ, विशेषकर अल्पसंख्यकों के प्रति पक्षपातपूर्ण व्यवहार तथा उत्तेजक एवं तिरस्कारपूर्ण व्यवहार इस यात्रा का मुख्य विषय था। मुशावरत के महासचिव और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख श्री सैयद तहसीन अहमद ने इस अवसर पर कहा कि कुछ विभाजनकारी ताकतों की प्रवृत्ति देश में अराजकता पैदा करने की है, उनकी योजना को विफल करने के लिए लोगों को एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, परिषद ने सामाजिक संगठनों और कई समूहों के सहयोग से देश में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए “हिंसा मुक्त भारत” अभियान शुरू किया है। जबकि मुशावरत के युवा विंग के सचिव श्री शम्सुजजुहा ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बहुत जल्द असम और उसके जिलों में मुशावरत को मुनज़्ज़म करेगी। इस प्रश्न पर भी विचार किया गया कि मुसलमानों को अन्य अल्पसंख्यकों, जिनकी कुल संख्या 20% से अधिक है, के साथ मिलकर काम करना चाहिए जबकि एक अन्य राय यह थी कि इस समय देश के कुछ राज्यों में ‘कास्ट सर्वे ‘ किए जा रहे हैं और चूँकि मुसलमान भी भारतीय मूल के लोग हैं। इसलिए हम देश की 80% आबादी का हिस्सा हैं, वहीं बैठक में शामिल कई प्रतिभागियों ने मुस्लिम समुदाय में वर्गों और संप्रदायों के अंतर को लेकर चिंता व्यक्त की और समुदाय के भीतर समीक्षा करने और काम करने का सुझाव दिया۔ हाज़िरीन की राय थी कि जिस तरह दुनिया के विकसित देशों में बिना ईवीएम के चुनाव होते हैं, उसी तरह भारत में भी पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बिना ईवीएम के चुनाव होने चाहिए और मुशावरत से इस मांग को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। स्थानीय रहनुमाओं ने मुशावरत के केंद्रीय प्रतिनिधियों का ध्यान असम के उन मुसलमानों की ओर आकर्षित किया जो पीढ़ियों से सरकारी भूमि पर रह रहे हैं और वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा विस्थापित किए जा रहे हैं, जबकि मुशावरत ने इस मुद्दे पर स्थानीय संगठनों और रहनुमाओं के साथ सहयोग करने का आश्वासन दिया। इस बैठक में प्रमुख राजनीतिक रहनुमा और पूर्व सांसद श्री सैयद अजीज पाशा उपस्थित थे। इस बैठक में जमीयत उलेम ए हिंद, जमीयत अहले हदीस असम, अल्पसंख्यक शगरून परिषद, चार्च पुरी सत्य परिषद, असम सिविल सोसाइटी और जस्टिस फोरम असम जैसे प्रमुख सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा, कुछ जिलों के प्रमुख नेताओं, बुद्धिजीवियों और पूर्व नौकरशाहों आदि ने भी भाग लिया, जिनमें प्रोफेसर अब्दुल मनान (पूर्व प्रोफेसर, गुवाहाटी विश्वविद्यालय), मुहम्मद अलाउद्दीन आईएएस (सेवानिवृत्त), श्री अज़ीज़ुल रहमान (पूर्व प्रिंसिपल एवं पूर्व अध्यक्ष ऑल आसाम मुस्लिम स्टूडेंट्स यूनियन) और श्री लश्कर अली के प्रिय नाम उल्लेखनीय हैं। बैठक का संचालन श्री अब्दुल बातिन खान (विधायक) ने किया। द्वारा जारी शहाबुद्दीन आफिस सेक्रेट