हमारे बारे में

हम कौन हैं

ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे-मुशावरत (AIMMM) भारत के मुसलमानों की धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह मुस्लिम संगठनों, सामाजिक समूहों और गणमान्य व्यक्तियों का परिसंघ है, जो सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता, अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने, देश की विविधता और सामाजिक ताने-बाने की रक्षा सुनिश्चित करने में प्रयासरत है। अल्पसंख्यक अधिकारों और समावेशी प्रतिनिधित्व की वकालत, समुदाय कल्याण का समग्र सशक्तिकरण तथा देश के शोषित पीङित नागरिकों के लिए न्याय हमारा लक्ष्य है।

हमारा इतिहास

मुस्लिम संगठनों के उच्च स्तरीय परिसंघ, मुशावरत का गठन 8-9 अगस्त 1964 को लखनऊ में मुस्लिम समुदाय के नेताओं की एक ऐतिहासिक बैठक में किया गया था। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेता, स्वतंत्रता सेनानी और भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पं नेहरू के करीबी सहयोगी रहे, डॉ. सैयद महमूद ने सामुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, राजनैतिक सामाजिक मुद्दों पर न्याय की लङाई और सामाजिक ताने-बाने को दरपेश खतरे पर विचार विमर्श के लिए समुदाय के सभी विचारधारा के रहनुमाओं को साथ लाने में अग्रणी भूमिका निभाई। उद्घाटन समारोह को जाने-माने मुस्लिम विद्वान और इस्लामी विचारक स्वर्गीय सैयद अबुल हसन अली मियां नदवी ने संबोधित किया जबकि समारोह की अध्यक्षता डॉ सैयद महमूद ने की। पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सैयद महमूद और महासचिव तत्कालीन सांसद एमएन अनवर को चुना गया था। इस के संस्थापक सदस्यों में इन दोनों के साथ मुफ्ती अतीकुर रहमान उस्मानी, मुहम्मद इस्माइल, मौलाना अबुललैस इस्लाही, मौलाना मुहम्मद मंज़ूर नोमानी, मुल्ला जान मुहम्मद, मौलाना सैयद अबुल हसन अली नदवी, इब्राहिम सुलेमान सेठ और मौलाना असद मदनी शामिल थे | डॉ. सैयद महमूद ने 1964 से 1967 तक सदर के रूप में कार्य किया। उनके बाद मौलाना अतीकुर रहमान उस्मानी पहले कार्यकारी अध्यक्ष और फिर अध्यक्ष (1976 से 1984) रहे, उनके बाद शेख जुल्फिकारुल्लाह (1984 से 1996) और मौलाना मुहम्मद सालिम कासमी (1996-1999) ने अध्यक्ष पद संभाला। वर्ष 2000 से प्रसिद्ध राजनयिक और पूर्व सांसद, सैयद शहाबुद्दीन 2007 तक सदर रहे। फिर डॉ ज़फ़रुल इस्लाम खान ने दो कार्यकाल के लिए इस पद को संभाला। उनके बाद जाने-माने मुस्लिम बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता नवैद हामिद ने 2016 में यह जिम्मेदारी ली और अप्रैल 2023 तक सदर के रूप में सेवा करते रहे। अब 2023 में फिरोज अहमद, अधिवक्ता को सदर चुना गया। मुशावरत की स्थापना का उद्देश्य भारतीय मुस्लिम समुदाय के नेतृत्व को समुदाय के धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर सहयोग और समन्वय की सुविधा प्रदान करना और एक मरकज़ी निकाय के रूप में कार्य करना है। इसके अलावा, यह देश के विभिन्न समूहों के बीच सद्भाव और परस्पर समझ को बढ़ावा देना है। साम्प्रदायिक हिंसा के पीड़ितों की सहायता और उनकी वैध शिकायतों को अधिकारियों के ध्यान में लाकर न्याय कराना है। मुसलमानों का राजनीतिक सशक्तिकरण और उनके सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के उपाय चिन्हित करना इस संगठन का मुख्य उद्देश्य है। अपने अस्तित्व के पांच दशकों से अधिक समय में, मुशावरत ने भारत के विभिन्न हिस्सों में इस संबंध में विचार-गोष्ठी और बैठकें आयोजित की हैं। समान नागरिक संहिता, वक्फ संपत्ति और मुसलमानों के पिछड़ेपन जैसे मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय की आवाज उठाई। मुशावरत ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिनिधिमंडल भेजे और कई राज्यों में बाढ़, भूकंप और दंगों के पीड़ितों को सहायता मुहैया कराई। शिक्षा और अन्य कल्याणकारी परियोजनाओं में युवाओं की भागीदारी, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और देश के नागरिकों के बीच अंतर्जातीय सद्भाव को लगातार बढ़ावा देना मुशावरत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लोकतंत्र, सेक्यूलरिज़्म, सामाजिक न्याय और मानव अधिकारों के सिद्धांतों का पालन करते हुए इसकी सरगर्मी हमेशा संविधान के ढांचे के भीतर, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रही है। मुशावरत आम चिंता के मुद्दों पर प्रमुख मुस्लिम संगठनों के बीच विचार विमर्श के माध्यम से आम सहमति बनाने का प्रयास करती है। टाडा और पोटा जैसे क़ानून के तहत गिरफ्तार निर्दोष व्यक्तियों की रिहाई, विधायी निकायों में समुदाय का प्रतिनिधित्व और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में धांधली पर भी मुशावरत ने हमेशा काम किया है। इस परिचय को पढ़ने के लिए धन्यवाद। कृपया अधिक जानकारी और स्पष्टीकरण के लिए बेझिझक संपर्क करें।

हम क्या करते हैं

सद्भाव का प्रसार

विविध संस्कृतियों और समुदायों के बीच सद्भाव का प्रसार एवं प्रोत्साहन

 

सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण

मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के मार्गों की खोज

अधिकारों की रक्षा

मुसलमानों के संवैधानिक, धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा और संरक्षण

 

शोषित-पीड़ित की सहायता

सांप्रदायिक हिंसा एवं प्राकृतिक प्रकोप के मारों की सहायता का यथा संभव प्रयास

न्याय के लिए संघर्ष

संविधान द्वार सुनिश्चित न्याय की प्राप्ति के लिए संघर्ष और त्वरित न्याय प्रक्रिया, निष्पक्ष न्याय प्रणाली के लिए जनजागरण

 

विशेषज्ञता का आदान-प्रदान

समुदाय के हितों की रक्षा के लिए समय समय पर विचार विमर्श और विशेषज्ञ जानकारियों का आदान-प्रदान

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